नई दिल्ली (जेएनएन/रायटर्स)। देश की दिग्गज ई-कॉमर्स फर्म फ्लिपकार्ट ने तीन कंपनियों से 1.4 अरब डॉलर (करीब 9,050 करोड़ रुपये) की राशि जुटाई है। यह किसी भी भारतीय इंटरनेट कंपनी की ओर से जुटाई गई सबसे बड़ी राशि है। माइक्रोसॉफ्ट, टेनसेंट होल्डिंग्स (चीन की इंटरनेट सेवा कंपनी) और ईबे ग्लोबल ने यह रकम उपलब्ध कराई है। फ्लिपकार्ट ने सोमवार को इस सौदे का एलान किया। इससे पहले भी फ्लिपकार्ट कई दौर में तीन अरब डॉलर (लगभग 19,365 करोड़ रुपये) जुटा चुकी है। इसमें ज्यादातर रकम टाइगर ग्लोबल, एस्सेल पार्टनर्स व डीएसटी ग्लोबल जैसे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों से आई। फ्लिपकार्ट का मौजूदा वैल्युएशन 11.6 अरब डॉलर (करीब 74,800 करोड़ रुपये) है। वर्ष 2015 में कंपनी का बाजार मूल्य 15 अरब डॉलर (लगभग 96,825 करोड़ रुपये) आंका गया था।1यह घोषणा उस समय हुई है, जब कुछ महीने से भारतीय इंटरनेट कंपनियों के लिए फंडिंग के स्नोत सूखते नजर आ रहे थे। यही नहीं, फ्लिपकार्ट व स्नैपडील को अमेजन जैसी ग्लोबल ई-कॉमर्स दिग्गज की और कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ेगा। अमेजन ने बीते साल भारत में पांच अरब डॉलर का निवेश करने का एलान किया था।

फ्लिपकार्ट के संस्थापक सचिन बंसल व बिन्नी बंसल ने कहा कि इस सौदे के जरिये भारत में तकनीकी की मदद से कारोबार को बदलने का भरोसा और मजबूत हुआ है। अमेजन में काम कर चुके सचिन और बिन्नी ने दस साल पहले फ्लिपकार्ट की स्थापना की थी।

स्नैपडील को खरीदने की फिराक में: 
ऐसी चर्चाएं हैं कि फ्लिपकार्ट घरेलू प्रतिस्पर्धी ई-कॉमर्स कंपनी स्नैपडील को भी खरीदने की फिराक में है। वह इसके लिए जापानी कंपनी सॉफ्टबैंक के साथ बातचीत कर रही है। स्नैपडील की प्रमोटर कंपनी जैस्पर इंफोटेक में जापानी कंपनी सबसे बड़ी शेयरधारक है। अगर यह सौदा हुआ तो देश के ई-कॉमर्स क्षेत्र का सबसे बड़ा अधिग्रहण होगा।

किराना कारोबार में भी उतरेगी 
फ्लिपकार्ट के सीईओ कल्याण कृष्णमूर्ति ने कहा है कि फिर से किराना (ग्रोसरी) कारोबार में उतर रही है। पिछले तीन साल में कई कंपनियां किराने के कारोबार से बाहर हो चुकी हैं। एक समय 50 ई-ग्रोसरी कंपनियां थी। अब सिर्फ बेंगलुरु की बिग बास्केट व गुरुग्राम की ग्रोफर्स ही बची हैं। इसमें तीसरी कंपनी अमेजन है, जिसने 2016 से पांच शहरों में कारोबार शुरू किया है। भारत में 80 फीसद ग्रोसरी का सामान खरीदा जाता है। यहां खाने और किराने का 23,03,500 करोड़ रुपये का बाजार है। अभी इसमें सिर्फ आधा फीसद ही ऑनलाइन खरीदारी होती है।

फ्लिपकार्ट में विलय होगा ईबे इंडिया का
ग्लोबल कंपनी ईबे फ्लिपकार्ट में हिस्सेदारी के बदले 50 करोड़ डॉलर (करीब 3,225 करोड़ रुपये) का नकद निवेश करेगी। कंपनी ने ईबे इंडिया का कारोबार भी फ्लिपकार्ट को बेच दिया है। अब ईबे इंडिया को फ्लिपकार्ट चलाएगी। इसके अलावा फ्लिपकार्ट ने ईबे ग्लोबल से करार किया है। इसके तहत ईबे के प्रोडक्ट भारत में आ सकेंगे। साथ ही, फ्लिपकार्ट के उत्पाद विश्व के खरीदारों तक पहुंच सकेंगे। इस साल के अंत तक यह सौदा पूरा हो जाएगा। इसके बाद ईबे अपने सक्रिय ग्राहक फ्लिपकार्ट को ट्रांसफर कर देगी। अलबत्ता ईबे डॉट इन का अलग फर्म के रूप में अस्तित्व बना रहेगा।

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